उत्तराखंड

असम मॉडल से संवर सकती है उत्तराखंड की चाय इंडस्ट्री, 10 अप्रैल से शुरू होगा सात दिवसीय अध्ययन दौरा
उत्तराखंड / 2 days, 22 hours पहले / 29 मा 2026 / 17 बार देखा गया / 2 मिनट पढ़ने में

असम मॉडल से संवर सकती है उत्तराखंड की चाय इंडस्ट्री, 10 अप्रैल से शुरू होगा सात दिवसीय अध्ययन दौरा

उत्तराखंड असम मॉडल से चाय उद्योग बढ़ाएगा, 10 अप्रैल दौरा शुरू

उत्तराखंड में चाय उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने के साथ किसानों की आय में सुधार के उद्देश्य से राज्य सरकार असम मॉडल अपनाने की दिशा में अहम पहल करने जा रही है। इसी क्रम में 10 अप्रैल से सात दिनों का विशेष अध्ययन दौरा आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रतिनिधिमंडल असम की चाय खेती, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और विपणन व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन करेगा। इस अध्ययन दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल असम के विभिन्न चाय बागानों और आधुनिक चाय फैक्ट्रियों का निरीक्षण करेगा। यहां अपनाई जा रही उन्नत खेती तकनीकों, पत्तियों की प्रोसेसिंग प्रक्रिया, बेहतर पैकेजिंग व्यवस्था और बाजार तक पहुंच बनाने के प्रभावी तरीकों को समझा जाएगा, ताकि इन्हें उत्तराखंड में लागू करने की संभावनाओं को मजबूत किया जा सके। दौरे के दौरान स्थानीय चाय उत्पादकों और क्षेत्र के विशेषज्ञों से भी संवाद किया जाएगा। उनके अनुभव और सुझावों के आधार पर उत्तराखंड में चाय उत्पादन को अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बनाने की दिशा तय की जाएगी। दरअसल, असम देश में चाय उत्पादन का सबसे संगठित और मजबूत क्षेत्र माना जाता है। वहां लंबे समय से बेहतर खेती व्यवस्था, वैज्ञानिक प्रोसेसिंग और मजबूत बाजार नेटवर्क के चलते चाय उद्योग निरंतर प्रगति कर रहा है, जिससे किसानों को भी स्थायी आर्थिक लाभ मिल रहा है। अब इन्हीं सफल मॉडलों को समझकर उत्तराखंड में लागू करने की योजना तैयार की जा रही है। अध्ययन दौरे के दौरान तेजी से विकसित हो रहे टी-टूरिज्म मॉडल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। असम में चाय बागानों को पर्यटन से जोड़कर आय के नए स्रोत विकसित किए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इसी मॉडल को उत्तराखंड में लागू करने की संभावनाओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यदि चाय उत्पादन को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाता है तो पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिल सकेगा। इससे राज्य के पर्यटन क्षेत्र को भी नया विस्तार मिल सकता है। इसके साथ ही उत्तराखंड की चाय की ब्रांडिंग और पैकेजिंग को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि राज्य की चाय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बना सके और उत्पादकों को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल सके। कुल मिलाकर यह अध्ययन दौरा उत्तराखंड की चाय को नई पहचान दिलाने, किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने, पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने और टी-टूरिज्म को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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