देहरादून : वित्तीय वर्ष की समाप्ति आमतौर पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए चिंता लेकर आती है। एक तरफ विभागों में सालभर के बजट का हिसाब-किताब बंद किया जाता है, तो दूसरी तरफ वेतन और पेंशन के भुगतान में देरी की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन इस बार उत्तराखंड सरकार ने इस परेशानी को पहले ही भांप लिया है।
उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर है। हर साल मार्च में वेतन और पेंशन अटकने से जूझने वाले लाखों लोगों के लिए वित्त विभाग ने इस बार बड़ा और समय पर फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन और 2026-27 की शुरुआत के बीच पैदा होने वाली दिक्कत को देखते हुए विभाग ने महीने की पहली ही तारीख को साफ निर्देश जारी कर दिए।
हर साल क्यों आती है दिक्कत
दरअसल मार्च का महीना सरकारी तंत्र के लिए सबसे अहम होता है। पूरे साल के बजट का लेखा-जोखा इसी दौरान बंद होता है और नए वित्तीय वर्ष की तैयारियां शुरू होती हैं। कई बार बजट की औपचारिक स्वीकृति और धनराशि जारी होने में देरी हो जाती है, जिसका सीधा असर कर्मचारियों के वेतन और पेंशनर्स की पेंशन पर पड़ता है। हालात ऐसे बन जाते हैं कि भुगतान 15-20 दिन तक लटक जाता है।
बजट की प्रत्याशा में भी होगा भुगतान
इसी समस्या से निपटने के लिए उत्तराखंड वित्त विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि बजट की प्रत्याशा में ही कर्मचारियों का वेतन और पेंशनर्स की पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। यानी अब अंतिम स्वीकृति या धनराशि जारी होने का इंतजार किए बिना भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
विधानसभा से पहले ही मिल चुकी है मंजूरी
आदेश में यह भी साफ किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आय-व्यय की अनुदान मांगें पहले ही उत्तराखंड विधानसभा से पारित हो चुकी हैं। इसके साथ ही विभागों को वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। सरकार की प्राथमिकता कर्मचारियों और पेंशनर्स को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
इस फैसले से सबसे ज्यादा राहत उन पेंशनर्स को मिलेगी, जो हर साल मार्च में आर्थिक असमंजस से जूझते थे। पेंशन पर निर्भर बुजुर्गों के लिए देरी रोजमर्रा की जरूरतों को मुश्किल बना देती थी। वहीं कर्मचारियों के घरेलू बजट पर भी समय पर वेतन न मिलने का सीधा असर पड़ता था।
यूपी मॉडल पर चला उत्तराखंड
गौर करने वाली बात यह है कि ऐसी व्यवस्था पहले से उत्तर प्रदेश में लागू है, जहां मार्च में बजट की प्रत्याशा में भुगतान के निर्देश दिए जाते हैं। अब उत्तराखंड ने भी वही मॉडल अपनाकर अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत देने की कोशिश की है।
कर्मचारियों में खुशी, सरकार पर भरोसा बढ़ा
वित्त विभाग के इस फैसले को प्रशासनिक स्तर पर भी अहम माना जा रहा है। समय पर वेतन-पेंशन मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और शासन के प्रति भरोसा मजबूत होगा। राज्य के कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने भी इस आदेश का स्वागत करते हुए इसे “समय पर लिया गया सही फैसला” बताया है।