ब्रेकिंग पुलिस ने चेकिंग के लिए रोकी कार, तो फायरिंग कर भागे बदमाश | कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज: सरकार ने वेतन और पेंशन को लेकर किया बड़ा ऐलान

उत्तर प्रदेश

टक्साल गोलीकांड: 22 साल बाद फिर चर्चा में ‘धनंजय सिंह बनाम अभय सिंह’, सोशल मीडिया पर वायरल हुई पुरानी जंग
उत्तर प्रदेश / 2 hours, 14 minutes पहले / 11 अप्र 2026 / 163 बार देखा गया / 2 मिनट पढ़ने में

टक्साल गोलीकांड: 22 साल बाद फिर चर्चा में ‘धनंजय सिंह बनाम अभय सिंह’, सोशल मीडिया पर वायरल हुई पुरानी जंग

वाराणसी के चर्चित 'टक्साल गोलीकांड' में 22 साल बाद अदालत का फैसला आने वाला है। इस बीच 2002 की एक पुरानी 'अखबार की कटिंग' सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसने पूर्व सांसद धनंजय सिंह और अभय सिंह के बीच की उस खौफनाक जंग की यादें ताजा कर दी हैं। जानिए क्या था वो पूरा मामला जिसने यूपी की सियासत को हिला दिया था।

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के सियासी और आपराधिक इतिहास में 'नदेसर के टक्साल गोलीकांड' का नाम जब भी आता है, तो 2002 का वह मंजर आँखों के सामने तैरने लगता है। करीब दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद, अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव पर है। अदालत में सुनवाई पूरी हो चुकी है और किसी भी वक्त फैसला आ सकता है। लेकिन इस फैसले की आहट के बीच, सोशल मीडिया पर 22 साल पुरानी एक 'अखबार की कटिंग' ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में पुरानी हलचल पैदा कर दी है।

आखिर क्यों वायरल हो रही है 2002 की यह रिपोर्ट?

इंटरनेट पर वायरल हो रही 13 अक्टूबर 2002 की इस पेपर कटिंग में तत्कालीन सरगना अभय सिंह और उसके साथियों को कानपुर पुलिस की गिरफ्त में दिखाया गया है। तस्वीर में आरोपी अवैध हथियारों के साथ नजर आ रहे हैं। इस पुरानी खबर ने उन दिनों के खौफनाक संघर्ष की यादें ताजा कर दी हैं, जब पूर्वांचल में वर्चस्व की जंग सड़कों पर खून बहा रही थी।

उस समय की रिपोर्ट के मुताबिक, अभय सिंह को कानपुर पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उसने अपने शूटरों के साथ मिलकर पूर्व सांसद धनंजय सिंह के काफिले पर जानलेवा हमला किया था।

वर्चस्व की वो शाम: जब गोलियों से गूंज उठा था नदेसर

घटना 4 अक्टूबर 2002 की है। वाराणसी के नदेसर इलाके में स्थित टक्साल सिनेमा के पास धनंजय सिंह का काफिला गुजर रहा था। तभी अत्याधुनिक हथियारों से लैस हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले ने न केवल वाराणसी बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर और ड्राइवर समेत कुल पांच लोग लहूलुहान हुए थे। इस दुस्साहसिक वारदात के पीछे ठेकेदारी और राजनीतिक रसूख की पुरानी दुश्मनी को मुख्य वजह माना गया था।

जेल अफसर की हत्या की भी थी तैयारी!

वायरल हो रही इस पुरानी रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी था कि अभय सिंह और उसका गिरोह सिर्फ धनंजय सिंह तक सीमित नहीं था। पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि उन्होंने एक जेल अधिकारी की हत्या की भी पूरी साजिश रच ली थी। उस वक्त के एसएसपी आर.पी. सिंह ने मीडिया को बताया था कि अभय सिंह के खिलाफ हत्या और रंगदारी जैसे दो दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे।

अब अदालत के फैसले का इंतजार

22 साल के लंबे इंतजार और सैकड़ों तारीखों के बाद अब कानून अपना अंतिम निर्णय सुनाने वाला है। राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर काफी उत्सुकता है कि दो दशक पुराने इस हाई-प्रोफाइल मामले में इंसाफ का ऊँट किस करवट बैठता है। 

साझा करें

संबंधित लेख

कोई संबंधित लेख नहीं मिला।